वैश्विक महामारी के चलते भारत की जीडीपी में भारी गिरावट | Massive decline in India's GDP due to global epidemic

वैश्विक महामारी के चलते भारत की जीडीपी में भारी गिरावट आई है। कोरोना और लॉक डाउन की वजह से न जाने कितने लोग बोरोजगार हो गए जिससे उनकी आमदनी बिलकुल जीरो हो गई। कई घरों में चूल्हा भी बड़ी मुश्किल से जल रहा है। जो भुगत रहे है उन्हें पता है, जिनके पैरो में फोरे  पड़े है वहीं जानते है इस पीड़ा का अर्थ, पर शायद सरकार को लोगों की परेशानी औरअर्थ व्यवस्था कि सेहत नहीं समझ आती है। 






  • GDP को कैसे कैलकुलेट किया जाता है 
  • भारत की GPP कितनी है 2020 
  • जीडीपी का फुल फॉर्म क्या होता है 
  • जीडीपी का मतलब क्या होता है 
  • जीडीपी का फार्मूला क्या होता है 


सरकार अर्थ व्यवस्था को जीडीपी के हिसाब से मानती हैं। इस वैश्विक महामारी में हमारे देश का जीडीपी कितना गिरा ख़ुद केंद्र सरकार ने आंकड़ा जारी करके बताया है। सरकार की ओर से NSO ने GDP के आंकड़े जारी किए है। वित वर्ष 2020-21 के पहले तिमाही यानी अप्रैल से जून के आंकड़े आए है और जैसा अनुमान लगाया जा रहा था उससे भी खराब आंकड़े आए हैं। भारत की पहली तिमाही की GDP- 23.90% रही हैं। इसे यू कहे तो हमारी अर्थ व्यवस्था सिमट गई है। 


फ़ीसदी के हिसाब से ठीक से समझ में नहीं आता है तो आइये रुपए के हिसाब से समझने की कोशिश करते हैं। रुपए के हिसाब से तीन महीनों में लगभग आठ लाख करोड़ का नुक़सान हुआ है। पिछले साल से तुलना करते है तो पता चलता है कि बीते साल अप्रैल से जून में GDP लगभग छत्तीस लाख करोड़ रुपए रही, जो इस तिमाही में लगभग सताइस लाख करोड़ रह गई है। अमूमन GDP बढ़ती है लेकिन इस बार कम हुई है। 

रुपए और प्रतिशत के हिसाब से तो समझ लिए इसे शॉर्ट में समझते है यानी एक लाइन में। पिछले चालीस साल में किसी भी पैमाने से देखा जाए तो GDP माइनस में मतलब जीरो से भी कम हुई है।


ये सारी बाते तो हम समझ गए अब जानते है कि बार-बार आने वाला शब्द GDP क्या है और इसका अर्थ क्या है


हिन्दी में GDP को सकल घरेलू उत्पाद औरअंग्रेजी में ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट कहते है  , जिसमें सकल का मतलब सभी, घरेलू का मतलब घर यानी हमारा देश और उत्पाद का मतलब उत्पादन। कुल मिला कर देश में हो रहा हर प्रकार का उत्पादन को GDP यानी सकल घरेलू उत्पाद कहते है।



अब आइये जानते हैं ये सकल घरेलु उत्पाद का उत्पादन कहाँ होता है ?


क्या ये उत्पादन किसी कारखानों में होता है या खेतो में होता है ? कुछ वर्ष पहले इसके सूची में शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और कंप्यूटर जैसी अलग-अलग सेवाएँ को जोड़ा गया यानी सर्व सेक्टर, वह भी एक प्रकार का उत्पादन है। तो उत्पादन और सेवा क्षेत्र उनकी जो तरक्क़ी है या गिरावट है उस आंकड़े को GDP कहते है। 


GDP को हम साल भर के हिसाब से लेकर चलते है इसलिए सकल कहा गया। सब चीजों को जोड़े तो आगे से ये शब्द जब आपके सामने आए GDP क्या होता है ? याद रखिए एक वर्ष के अंदर हमारे पूरे देश में जो सकल घरेलू उत्पाद हुआ है। उसके योग को GDP कहते है। 

GDP को हम पिछले साल के हिसाब से तुलना के हिसाब से होता है। मतलब पिछले साल के मुकाबले जितनी बढ़ोतरी होती हैं, उसकी प्रतिशत GDP का विकास कहलाता है या ग्रोथ रेट कहलाता है। 

इसे एक उदहारण से समझते हैं। मान लीजिए कि पिछले साल GDP 80 थी और इस साल 90 हो गई इसका मतलब की GDP 10 फ़ीसदी की ग्रोथ हुई है और मान लीजिए की पिछले साल GDP 80 थी और इस साल 70 ही रह गई तो इसका अर्थ ये हुआ कि GDP में-10 फ़ीसदी की गिरावट हुई है। GDP का हिसाब लगाने के लिए एक बेस इयर भी तय किया जाता है। क्योंकि इसी बेस इयर के आधार पर आगे के वर्षों की GDP गीनी जाती है। 

जिन लोगों ने नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल को ध्यान से देखा सुना और समझा है उन्हें ये बेस इयर शब्द कुछ जाना पहचाना लग रहा होगा। GDP की गणना हर तिमाही में होती है। 


अब वापस आते है-23.90% के आंकड़े पर इसका अर्थ ये है कि इस पहली तिमाही में पहले से ग्रोथ होने की दूर कि बात है, उद्योग धंधे के ठप होने से पिछले साल के मुकाबले उत्पाद 23.90% घटे है और इसलिए जीडीपी का आंकड़ा माइनस में है।

हमारे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बात करे तो यहाँ पर-39.3 फ़ीसदी है। माइनिंग की बात करे तो-41.3 फ़ीसदी है। भवन निर्माण की बात करे तो-50% है। ये वह तीन क्षेत्र है जिनमे जो औसत गिरावट आई है उससे कहीं ज़्यादा कि गिरावट है। बहुत सारी नौकरियाँ गई है। 


अब आपने गणित पर थोड़ा भी ग़ौर किया होगा तो आप समझ जाएंगे कि हम आपको जो जीडीपी का ग्रोथ रेट बता रहे है जो माइनस में है। उसके मुकाबले इन क्षेत्रों में ग्रोथ और ज़्यादा घटी है। तो कहीं बढ़ी भी होगी। तब ही औसत इतना आया। 


कहाँ पर बढ़ी है ग्रोथ रेट


कृषि क्षेत्र में इसकी ग्रोथ पिछली तिमाही 3% के मुकाबले 3.4% हो गई है। दशमलव में कम है लेकिन पूरा पूरी आंकड़ों को कुछ कम बुरा बनाने का योगदान देश के कृषि क्षेत्र से ही मिला है। 

पर ऐसा नहीं है कि जीडीपी पर आंकड़े आने के बाद हमे पता चला है कि बड़ा खराब हो गया। पिछले दिनों RBI की वार्षिक रिपोर्ट आई थी इसमें अर्थ शास्त्र पर नज़र रखने वाली एजेंसी ग्रोथ रेट के माइनस में जाने के संकेत दे दिए थे।


जब लॉक डाउन की अवधि बढ़ाई जा रही थी तब भी रघुराम राजन समेत कई बड़े अर्थ शास्त्रियों ने इस बात के लिए आगाह किया था, की लॉक डाउन वाले काम खतरनाक साबित होंगे। कई अर्थ शास्त्री तब भी अर्थ व्यवस्था को शुरू करने की सलाह दे रहे थे, लेकिन सरकार का फ़ैसला ये था कि जान है तो जहान है। 


सरकार ये मान कर चली की पहले देश वासियों की जान बचाना है उसके बाद अर्थ व्यवस्था या और भी दूसरी चीज। 

अब आप खुद देख लीजिये की जान कितनी बची ? Covid पर कितना कंट्रोल हुआ ? आंकड़े आपके सामने है। 

आंकड़े अब जीडीपी के भी आ गए है। 28 अगस्त को GST काउंसिल की बैठक हुई थी, इस बैठक में कोरोना के दौरान GST से कमाई और इसके चलते हुआ घाटा इसके बारे में वित मंत्री निर्मला सीतारमण ने टिप्पणी की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि ये सब ACT of GOD हैं, बीमारी फैलना एक्ट ऑफ गॉड हो सकता है लेकिन अर्थ व्यवस्था को मज़बूत रखना Act of government हैं। 


ये बात इसलिए है कि भारत से ज़्यादा कोरोना जिस देश में फैली उन देशों की अर्थ व्यवस्था इतनी खराब नहीं हुई, बड़े-बड़े देशों को अर्थ व्यवस्था में नुक़सान हुआ है लेकिन सबसे ज़्यादा नुक़सान भारत को हुआ है।




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